दगडूशेठ गणपति मंदिर के बारे में जानिए कुछ रोचक बातें

दगडूशेठ गणपति मंदिर के बारे में जानिए कुछ रोचक बातें – नमस्कार दोस्तों कैसे हैं आप सभी ? मैं एक बार फिर से आप सभी का स्वागत करता हूं हमारे इस बिल्कुल नए आर्टिकल पर । दोस्तों आज हम आपको अपने इस आर्टिकल के माध्यम से भगवान श्री गणेश के एक बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर के बारे में पूरी जानकारी देंगे।

साथ ही साथ हम आपको आज इस आर्टिकल में यह भी बताएंगे कि यह मंदिर आखिर क्यों इतना खास है और इस मंदिर की इतनी मान्यता क्यों है ?तो दोस्तों अगर आपको भी नई नई जगहों के बारे में जानकारी पाना अच्छा लगता है तो आप हमारा आर्टिकल पूरा आखिरी तक पढ़िए ।

दोस्तों हिंदू धर्म में भगवान गणपति का एक अलग स्थान है । कोई भी कार्य करने से पहले भगवान गणेश को याद किया जाता है और उनकी पूजा भी की जाती है । वैसे तो भगवान गणेश के भारत में कई सारे मंदिर हैं और अन्य सभी मंदिरों में भी आपको भगवान गणेश की मूर्ति जरूर देखने को मिलेगी क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि जब तक भगवान गणेश की पूजा अर्चना नहीं होती तब तक अन्य कोई भगवान भी प्रसन्न नहीं होते हैं।  

दोस्तों भगवान गणेश के भारत में कई मंदिर हैं लेकिन उनमें से सबसे ज्यादा रहस्यमई मंदिर पुणे में स्थित है जिसे दगडूशेठ गणपति मंदिर कहां जाता है । आज हम आपको इसी मंदिर से जुड़ी रोचक जानकारियां देंगे और यह भी बताएंगे कि आखिर इस मंदिर में ऐसा क्या है जो इस मंदिर की मान्यता इतनी अधिक है । 

जानिए कैसे पड़ा इस मंदिर का नाम ?

दोस्तों आप सोच रहे होंगे कि दगडूशेठ नाम तो भगवान गणेश का कहीं भी लिखा हुआ नहीं है । दोस्तों आपको मैं बता दूं कि यह नाम उनको उनके परम भक्त दगडूशेठ ने दिया।  ऐसा कहा जाता है कि पूरे में एक दगडूशेठ नाम के बहुत प्रसिद्ध हलवाई थे जो भगवान गणेश के अनन्य भक्त थे उन्होंने ही इस मंदिर का निर्माण कराया इसीलिए इस मंदिर का नाम दगड़ुशेठ पड़ गया।

कब हुआ मंदिर का निर्माण ?

दोस्तों इस मंदिर की मान्यता बहुत पुरानी है यह मंदिर बहुत प्राचीन मंदिर है । दोस्तों ऐसा कहा जाता है कि एक बार एक व्यक्ति जिसका नाम दगडूशेठ हलवाई था वह कोलकाता से मिठाइयां बेचते बेचते पुणे आ गए वह साथ में अपनी बेटी और अपने पत्नी को भी लेकर आए थे। 

 उस समय पुणे में एक भयंकर महामारी प्लेग फैली थी। इसी बीमारी की चपेट में दगडूशेठ के बेटे और पत्नी आ गई और जिनकी मृत्यु हो गई। तब से दगड़ू सेठ ने भगवान गणेश की पूजा अर्चना में अपना जीवन लगा दिया । उन्होंने वर्ष 1893 में इस भयंकर गणेश मंदिर का निर्माण पूरा कराया और इस मंदिर की स्थापना की।

सोने की मूर्ति 

इस मंदिर में भगवान गणेश की मुख्य मूर्ति है जिसकी ऊंचाई 7.5 फीट है और चौड़ाई 4 फीट है । आपको जानकर हैरानी होगी कि इस मूर्ति में केवल चेहरे के निर्माण में 8 किलो सोने का इस्तेमाल किया गया है । 

इस मूर्ति के दोनों कान सोने के बनाए गए हैं और सोने का ही मुकुट है। यह प्रतिमा देखने में बहुत आकर्षक लगती है और सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है । भक्तों को यहां जाकर एक अलग ही आनंद मिलता है।

प्रथम गणेश उत्सव

दोस्तों आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत के पहले गरम दल के नेता बाल गंगाधर तिलक ने इस मंदिर में पहली बार गणेश उत्सव मनाया था तब से लेकर अब तक लगातार इस मंदिर में गणेश उत्सव कार्यक्रम धूमधाम से मनाया जाता है। 

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 निष्कर्ष

दोस्तों यह आपके लिए एक छोटी सी जानकारी थी जिसमें आज हमने आपको दगडूशेठ गणपति मंदिर के बारे में बताया।  हमें उम्मीद है कि यह जानकारी आपको पसंद आई होगी।  इसी तरह की अन्य जानकारी पाने के लिए आप हमारे साथ बने रहिए बहुत-बहुत धन्यवाद

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