बद्रीनाथ मंदिर से जुड़ी रोचक जानकारी इसका इतिहास कहानी और लोक कथाएं

By | October 17, 2020

बद्रीनाथ मंदिर से जुड़ी रोचक जानकारी इसका इतिहास कहानी और लोक कथाएं – नमस्कार दोस्तों कैसे हैं आप सभी ? मैं एक बार फिर से आप सभी के सामने उपस्थित हूं एक बिल्कुल नई जानकारी को लेकर ।  दोस्तों आज हम आपको अपने इस आर्टिकल के माध्यम से एक बहुत ही प्रसिद्ध तीर्थ स्थान जिसे बद्रीनाथ के नाम से जाना जाता है उसके बारे में पूरी जानकारी देंगे तो दोस्तों अगर आपको भी पर्यटन में रुचि है और आप नई नई जगह के बारे में जानकारी पाना चाहते हैं तो हमारा आर्टिकल नियमित रूप से पढ़िए।

बद्रीनाथ मंदिर

दोस्तों बद्रीनाथ मंदिर हिंदुओं का एक प्रमुख धार्मिक तीर्थ स्थान है । इसे लोग छोटा चार धाम के नाम से भी जानते हैं । बद्रीनाथ के दर्शन के लिए पूरे देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष यहां पहुंचते हैं । यहां पर भगवान श्री बद्री नारायण के दर्शन के लिए लोग आते हैं।  आइए अब आपको बद्रीनाथ मंदिर से जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण बातें बताते हैं । 

बद्रीनाथ धाम को छोटा चार धाम के नाम से भी लोग जानते हैं बद्री धाम की समुद्र तल से ऊंचाई 3132 मीटर है। 

बद्रीनाथ मंदिर भगवान श्री बद्रीनारायण का धाम है यहां पर भगवान विष्णु के रूप की पूजा की जाती हैं। 

बद्री धाम में मुख्य मूर्ति भगवान विष्णु की है । ऐसा कहा जाता है कि यह मूर्ति स्वयंभू है यानी कि यह मूर्ति स्वयं उत्पन्न हुई है।

बद्री धाम मंदिर में कुल 15 मूर्तियां हैं जिनमें से मुख्य मूर्ति भगवान विष्णु की है यह मूर्ति काले पत्थर की है और 1 मीटर ऊंची है।

बद्रीनाथ मंदिर में भगवान विष्णु की ध्यान मुद्रा है यहां पर आपको कुबेर लक्ष्मी और नारायण की अन्य मूर्तियां भी देखने को मिल जाएंगे।

बद्री धाम मंदिर में बनाया जाने वाला पुजारी दक्षिण भारत के केरल राज्य से चुना जाता है।

बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्री के मुख्य 5 स्वरूपों की पूजा की जाती है यही पांच स्वरूप भगवान विष्णु के 5 अवतार हैं।

बद्रीनाथ यात्रा 6 माह में आप कर सकते हैं बद्री धाम यात्रा के लिए अप्रैल से नवंबर के बीच का समय सर्वश्रेष्ठ होता है क्योंकि इसी समय बद्रीनाथ के धाम के कपाट खुले रहते हैं। 

बद्रीनाथ मंदिर के लोक कथा

दोस्तों बद्रीनाथ मंदिर को लेकर कई पौराणिक तथ्य है । ऐसा कहा जाता है कि एक बार भगवान विष्णु स्वयं अपना ध्यान केंद्रित करने के लिए एक अच्छा स्थान तलाश रहे थे।  स्थान तलाशते तलाशते हुए भगवान विष्णु अलकनंदा नदी के पास पहुंच गए उन्हें यह जगह बहुत पसंद आई और उन्होंने इसी जगह पर अपना तप करने का निश्चय कर लिया ।

भगवान विष्णु ने एक लीला करने की सोची इसके लिए उन्होंने एक छोटे बच्चे का रूप ले लिया और रूप लेकर वह रोने लग गए । बच्चे को रोता देख माता पार्वती जो कैलाश पर थी उनका हृदय द्रवित हो गया और स्वयं शिव जी के साथ उस बालक के सामने प्रकट होने का निश्चय किया।

जब माता पार्वती और शिव जी ने बच्चे से रोने का कारण पूछा तो बच्चे ने कहा कि उसे यह जगह बहुत पसंद है और उसे यहां पर तप करना है और उसने माता पार्वती से यह जगह उपहार में मांग ली और माता पार्वती ने यह जगह उपहार में देदी तब से इस जगह को भगवान विष्णु के पवित्र तीर्थ स्थान में गिना जाने लगा।

भगवान विष्णु का नाम बद्रीनाथ क्यों पड़ा ? 

दोस्तों बहुत से लोग सोचते हैं कि भगवान विष्णु का नाम बद्रीनाथ क्यों रखा गया तो इसके पीछे भी एक पौराणिक इतिहास है । कहा जाता है कि एक बार जब भगवान विष्णु नदी के किनारे तब कर रहे थे तब बहुत तेज हिमपात होने लगा भगवान विष्णु देखते ही देखते हिमपात में पूरी तरह डूब गए थे । तब माता लक्ष्मी जी का ह्रदय द्रवित हो गया और उन्होंने सोचा कि उन्हें भगवान विष्णु को हिमपात से बचाना चाहिए इसके लिए माता ने स्वयं एक वृक्ष का रूप धारण किया और जितने भी हिमगिर रही थी उसको अपने ऊपर सहन कर लिया।

दोस्तों ऐसा कहा जाता है कि यही कई वर्षों तक लगातार गिरती रही और माता उसी प्रकार वृक्ष का वेश धरे उसी से विष्णु भगवान की रक्षा करती रही । जब विष्णु भगवान का ध्यान खत्म हुआ तब उन्होंने यह देखा कि माता का शरीर पूरी तरह से ही हमसे ढक चुका है।

भगवान विष्णु ने माता लक्ष्मी से प्रसन्न होकर कहा कि जितने तपस्या मैंने की है उतनी तपस्या आपने भी की है इसीलिए मेरे साथ साथ आप की भी पूजा की जाएगी इसीलिए भगवान विष्णु को बदरीनाथ कहा जाने लगा जिसका तात्पर्य है बद्री के नाथ ।

बद्रीनाथ मंदिर में अन्य धार्मिक स्थल

ब्रह्मा कपाल

शेष नेत्र शेषनाग

चरण पादुका

तप्त कुंड

दोस्तों यह कुछ प्रमुख धार्मिक स्थल है जो बद्रीनाथ में है जब आप कभी बद्रीनाथ जाए तो यहां पर भी अवश्य जाएं ।

बद्रीनाथ मंदिर कैसे पहुंचे जाए ? 

अगर आप बद्रीनाथ मंदिर में जाना चाहते हैं तो हम आपको उसका रास्ता नीचे बता रहे हैं।

हेलीकॉप्टर से

अगर हाथ हेलीकॉप्टर से बद्रीनाथ पहुंचना चाहते हैं तो आपको किसी एजेंसी से संपर्क करना होगा क्योंकि बहुत सी एजेंसी हेलीकॉप्टर प्रोवाइड कराती हैं। देहरादून से आप कोई भी हेलीकॉप्टर ले सकते हैं यहां से बद्रीनाथ मंदिर की दूरी दूरी 100 किलोमीटर है।

ट्रेन से

अगर आप ट्रेन से बद्रीनाथ मंदिर जाना चाहते हैं तो आपको ऋषिकेश स्टेशन पहुंचना होगा यहां से बद्रीनाथ 297 किलोमीटर दूर स्थित है।

बद्रीनाथ मंदिर जाने का सही वक्त 

दोस्तों अगर आप बद्रीनाथ मंदिर जाने का प्लान बना चुके हैं तो मैं आपको बता दूं कि बद्रीनाथ के कपाट मात्र 6 माह के लिए ही खुलते हैं । यह कपाट अप्रैल से मई और अक्टूबर से नवंबर के बीच में खुलते हैं आपको इसी समय जाना चाहिए ।

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निष्कर्ष

दोस्तों आज आपके लिए छोटी सी जानकारी थी जिसमें आज हम आपको बद्रीनाथ धाम के बारे में बताया।  हमें उम्मीद है कि यह जानकारी आपको पसंद आई होगी । इसी तरह की अन्य जानकारी पाने के लिए आप हमारे साथ बने रहिए बहुत-बहुत धन्यवाद ।