प्रयागराज (इलाहाबाद) में घूमने लायक प्रमुख जगहें

By | May 4, 2021

प्रयागराज (इलाहाबाद) में घूमने लायक प्रमुख जगहें : प्रयागराज शहर का पुराना नाम इलाहाबाद था। अकबर ने यहां पर दीन-ए-इलाही धर्म की स्थापना की थी इसलिए इस शहर का नाम बदल कर 1583 में इलाहाबाद रख दिया गया। इलाहाबाद नाम का अर्थ ‘अल्लाह का बगीचा’ है। लेकिन इलाहाबाद शहर का प्राचीन नाम प्रयाग था, जिसे देवप्रयाग भी कहा जाता था। लेकिन अपनी प्राचीन संस्कृति को बचाने के उद्देश्य से लगभग एक से डेढ़ साल पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस शहर का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया और इसे केंद्र सरकार से मंजूरी भी मिल चुकी है।

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प्रयागराज शहर भारत के सबसे प्रसिद्ध एवं पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। इस शहर में गंगा यमुना और सरस्वती तीन नदियों का संगम है जिसे देखने के लिए दुनिया भर से लोग प्रयागराज में आते हैं। प्रयागराज में हर 12 साल में एक बार कुंभ मेला का आयोजन होता है और 6 सालों में एक बार अर्ध कुंभ का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा हर साल माघ महीने में माघ मेला का आयोजन किया जाता है जो जनवरी महीने से लेकर फरवरी महीने के अंत तक चलता है। हर साल करोड़ों श्रद्धालु माघ मेला के समय गंगा स्नान के लिए प्रयागराज आते हैं और कल्पवास भी करते हैं।

प्रयागराज (इलाहाबाद) में घूमने लायक प्रमुख जगहें

यदि आप प्रयागराज शहर में घूमने का प्लान बना रहे हैं तो हम आपको प्रयागराज शहर में घूमने लायक प्रसिद्ध जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसको देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक इस शहर में आते हैं।

त्रिवेणी संगम

प्रयागराज में स्थित त्रिवेणी संगम को देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक यहां पर आते हैं। यहां पर 3 नदियों गंगा यमुना और सरस्वती एक दूसरे से मिलती हैं इसीलिए इसका नाम त्रिवेणी संगम है। आपकी जानकारी के लिए बता दें की पौराणिक कथाओं के अनुसार यह माना जाता है कि सरस्वती नदी लगभग 4000 साल पहले सूख गई थी लेकिन फिर भी हिंदू धर्म में इन तीनों नदियों का संगम बहुत ही मायने रखता है पुलिस स्टाफ इस जगह पर हर 12 साल में कुंभ मेला का आयोजन होता है और प्रतिवर्ष माघ मेला का आयोजन किया जाता है। माघ मेला में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

खुसरो बाग

खुसरो बाग इलाहाबाद के सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। खुसरो बाग को मुगल वंश के शासक जहांगीर ने अपने बेटे खुसरो के लिए बनवाया था। इस जगह पर राजकुमार खुसरो के साथ-साथ उनकी मां शाह बेगम की भी कब्र है। खुसरो बाग का अमरुद पूरे भारत में प्रसिद्ध है।

आनंद भवन

आनंद भवन भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का पूर्व निवास स्थान है। यह जगह पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का कार्यालय भी रह चुका है। लेकिन अब इसे म्यूजियम में बदल दिया गया है। साल 1970 में नेहरू परिवार के विरासत को जीवंत रखने के लिए इसे म्यूजियम के रूप में परिवर्तित कर दिया गया था। इससे पंडित जवाहरलाल नेहरु की पुत्री एवं भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारत सरकार को सौंप दिया था।

तारामंडल

भारत में पांच नेहरू तारामंडल बनाए गए हैं जिनमें से एक प्रयागराज में भी स्थित है। यहां पर अंदर जाकर आपको ऐसा महसूस होगा जैसे कि आप अंतरिक्ष में भ्रमण कर रहे हैं। इसके अंदर एक थिएटर है जहां के दीवारों और छत पर भी स्क्रीन लगे हुए हैं। यदि आप प्रयागराज भ्रमण करने गए हैं तो इस जगह को भी जरूर घूमे।

इलाहाबाद का किला

इस किला को साल 1583 में मुगल बादशाह अकबर के शासन काल में बनाया गया था। यह इंडो-इस्लामिक शैली में बना हुआ किला है जो संगम के तट पर स्थित है। यह अकबर द्वारा बनवाया गया सबसे बड़ा किला है। हालांकि अब आप अकबर के किले मैं अंदर जाकर नहीं देख सकते हैं क्योंकि इसे आम जनता के लिए बंद कर दिया गया है और अब भारतीय सेना इसका प्रयोग करती है।

इलाहाबाद के किले में स्थित अक्षय वट बरगद का पेड़ काफी प्रसिद्ध था। किवदंतियों के अनुसार कई लोग यहां पर आत्महत्या करते थे क्योंकि ऐसी मान्यता थी कि इस वृक्ष के नीचे आत्महत्या करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। हालांकि अभी भी आप इस वृक्ष को देख सकते हैं। इस किले में पातालपुरी मंदिर भी स्थित है जिसके बारे में यह मान्यता है कि यहां पर नरक के सभी द्वार स्थित हैं।

अशोक स्तंभ

अशोक स्तंभ इलाहाबाद के किले के बाहर स्थित है। इस स्तंभ पर ब्राह्मी लिपि में अशोक के शिलालेख हैं। बाद में दो अन्य शासकों ने इस पर शिलालेख जोड़े। 200 ईसवी में समुद्रगुप्त ने इसे कौशांबी से प्रयाग लाया और दरबारी कवि हरिशेष द्वारा रचित प्रयाग प्रशस्ति को इस पर खुदवाया था। इसीलिए अशोक स्तंभ को प्रयाग प्रशस्ति के नाम से भी जाना जाता है। इसके बाद 1605 ईस्वी में मुगल सम्राट जहांगीर ने अपने तख्त पर बैठने का वाकया भी इस पर खुद वाया। 1800 में किले की प्राचीर को सीधी बनाने के लिए इस स्तंभ को गिरा दिया गया लेकिन 1838 में अंग्रेजों ने इसे फिर से खड़ा कर दिया।

लेटे हनुमान जी का मंदिर

बड़े हनुमान जी का मंदिर प्रयागराज के संगम क्षेत्र में स्थित है और यह इलाहाबाद के किले से बिल्कुल सटकर है। ऐसी मान्यता है कि जब भगवान हनुमान के प्रतिमा को यहां पर लाया गया था तो वह गिर कर लेट गया इसके बाद कई लोगों ने उसे उठाने की कोशिश की लेकिन वह नीचे दबता चला गग। इसीलिए उसे वैसे ही छोड़ दिया गया। इसे इसे लेटे हनुमान जी मंदिर के नाम से जाना जाता है। एक ऐसी भी मान्यता है कि साल भर में एक बार गंगा भगवान बजरंगबली के इस मंदिर और उनके प्रतिमा को स्नान कराती है।

आलोपी मंदिर

आलोपी मंदिर प्रयागराज के आलोपीबाग में स्थित है। यह त्रिवेणी संगम से कुछ ही दूर दूरी पर स्थित है। आलोपी देवी मंदिर में कोई भी देवता विराजमान नहीं है बल्कि एक लकड़ी के रथ की पूजा की जाती है।

चंद्रशेखर आजाद पार्क (अल्फ्रेड पार्क, कंपनी गार्डन)

अल्फ्रेड पार्क में पूर्व स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद ने अंग्रेजों के हाथ ना आने के लिए खुद को गोली मार ली थी। इसीलिए बाद में इसका नाम बदलकर चंद्रशेखर आजाद पार्क रख दिया गया। प्रयागराज में इस पार्क को कंपनी गार्डन के नाम से ही जाना जाता है। यह प्रयागराज शहर के सिविल लाइंस क्षेत्र में स्थित है।

मनकामेश्वर मंदिर

मनकामेश्वर मंदिर प्रयागराज के कीडगंज इलाके में स्थित है। यमुना नदी के तट पर बसा हुआ है जिसके सामने भारतीय सेना का कैंटोनमेंट बोर्ड है। यहां पर भगवान शिव का शिवलिंग स्थित है। सावन के समय में या सोमवार के दिन इस जगह पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

प्रयागराज में अन्य घूमने वाली जगहें

इन सबके अलावा आप प्रयागराज में नया यमुना पुल ऑल सेंट कैथेड्रल चर्च फन गांव वाटर पार्क पब्लिक लाइब्रेरी नंदन कानन वाटर रिट्रीट इत्यादि जगहों पर घूम सकते हैं। इसके अलावा आप माघ के महीने में यानी जनवरी-फरवरी में माघ मेला देखने प्रयागराज आ सकते हैं।