पूर्वोत्तर भारत की खूबसूरत जगह कमलपुर

By | August 3, 2021

पूर्वोत्तर भारत की खूबसूरत जगह कमलपुर – यदि आप भारत की अच्छी अच्छी जगहों पर घूमना चाहते हैं तो पूर्वोत्तर में ऐसी बहुत सारी जगह है जहां पर घूमना आपके लिए बहुत ही दिलचस्प साबित हो – सकता है। पूर्वोत्तर कि राज्यों में त्रिपुरा में बहुत सारे पर्यटन स्थल है जहां पर घूमने में आपको काफी खुशी महसूस होगी।

त्रिपुरा के पूर्वी क्षेत्र में भलाई जिले में स्थित कमलपुर पर्यटन के लिहाज से बहुत ही अच्छी जगह है। यहां पर आपको कई सारे झरने झिलमिलाती झीलें और खूबसूरत नजारे देखने को मिलेंगे। इस आर्टिकल में हम आपको पूर्वोत्तर भारत की खूबसूरत जगह कमलपुर में घूमने लायक 5 जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं।

यह जगह दर्शनीय होने के साथ-साथ पूर्वोत्तर की प्रमाणिक संस्कृति और यहां रहने वाले जनजातियों के बारे में जानने का अवसर प्रदान करता है। यदि आप शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से ऊब चुके हैं और किसी अच्छी जगह जाकर सुकून का समय बिताना चाहते हैं तो कमलपुर का पर्यटन करना आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है।

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यहां पर आपको आदिवासी लोगों के संस्कृति को जानने का मौका मिलेगा और साथ ही साथ उनकी जीवनशैली को भी समझने का अवसर प्राप्त होगा। अब हम आपको कमलपुर में घूमने लायक पांच जगह बताने जा रहे हैं।

कमलपुर कैसे पहुंचे?

यदि आप वायु मार्ग द्वारा कमलपुर पहुंचना चाहते हैं तो यहां पर एक छोटा सा हवाई अड्डा है जो अन्य बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा रेल मार्ग से यहां पहुंचने के लिए आपको रेल्हेड का टिकट लेना पड़ेगा। इस स्टेशन पर भी देश के कई बड़े शहरों से नियमित ट्रेन आती है। इसके साथ ही साथ सड़क मार्ग द्वारा कमलपुर पहुंचने के लिए आपको कमलपुर बस स्टॉप पर उतरना होगा।

कमलपुर जाने का सही समय क्या है?

यदि आप कमलपुर जाकर वहां की पहाड़ी वादियों का लुफ्त उठाना चाहते हैं तो सर्दियों के मौसम में वहां पहुंचना आपके लिए अच्छा रहेगा। नवंबर से जनवरी माह तक बहुत सारे पर्यटक यहां पहुंचते हैं और इस दौरान यहां का औसत तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से लेकर 20 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। हालांकि ठंड के समय में आपको गर्म कपड़े लेकर जाना जरूरी है।

1. कमलेश्वरी मंदिर:

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मां काली का दूसरा नाम कमलेश्वरी भी है। शहर के बीचोबीच स्थित कमलेश्वरी मंदिर में काली देवी की पूजा की जाती है। आपको बता दें कि इसी के नाम पर कमलपुर शहर का नाम भी पड़ा है। यदि आप आध्यात्म प्रेमी हैं तो इस पवित्र मंदिर में दर्शन कर सकते हैं। यहां पर भक्तों इच्छाओं की पूर्ति के लिए पुजारियों द्वारा अनुष्ठान भी कराए जाते हैं। इस मंदिर मैं दर्शन करने के लिए हर समय दुनिया भर से पर्यटक यहां पर आते हैं।

2. उनाकोटी

सबसे पहले आपको बता दें कि उनाकोटी का बंगाली अर्थ एक करोड़ से कम होता है। त्रिपुरा में उनाकोटी एक प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है जहां पर भगवान शिव की मूर्ति स्थापित है। इस मंदिर में भगवान शिव की काफी पुरानी एवं बड़ी मूर्ति स्थापित है, जिस पर पुराने जमाने की नक्काशी की गई है। कई लोग यह मानते हैं कि इस मूर्ति को कल्लू कुमार ने निर्मित किया था। भगवान शिव ने खुद उनके सपने में आकर इस विशाल मूर्ति को बनाने का आदेश दिया था। इस पवित्र मंदिर में भगवान शिव की मूर्ति के अलावा भगवान गणेश, विष्णु नंदी, नरसिंह, हनुमान और कई अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं।

3. राइमा घाटी

यदि आप शहर की भाग दौड़ भरी जिंदगी से दूर होकर प्रकृति का आनंद लेना चाहते हैं तो राइमा घाटी का पर्यटन करना आपके लिए एक सुखद अनुभव होगा। आपको बता दें कि रायमा को त्रिपुरा जनजाति की मां का दर्जा भी दिया गया है। दरअसल इस घाटी से राइमा नदी बहती है इसीलिए इसे यह नाम दिया गया है। त्रिपुरा में पिकनिक मनाने के लिए यह एक बेहतर स्पॉट माना जाता है और यह जगह काफी शांत भी है। इसीलिए यदि आप शांति की तलाश कर रहे हैं तो यह जगह आपके लिए बेहतर साबित होगी।

4. हेरिटेज पार्क

हेरिटेज पार्क त्रिपुरा के आदिवासी एवं गैर आदिवासी इतिहास उनकी विरासत, परंपराओं और संस्कृति को दर्शाता है। इस पार्क का उद्घाटन 2012 में हुआ था। यह कमलपुर से लगभग 2 घंटे की दूरी पर स्थित है। कमलपुर में यह एकमात्र मनोरंजक पार्क है और यही कारण है कि यहां पर पर्यटकों की काफी भीड़ जमा होती है। इसमें नक्काशीदार फुटपाथ, फल-फूल वाले बगीचे और कई सारे औषधीय पौधे लगाए गए हैं। हेरिटेज पार्क 12 एकड़ में फैला हुआ है और इसीलिए इसे हेरिटेज नाम दिया गया है।

5. रोवा वन्यजीव अभ्यारण्य

यदि आप जंगली जानवरों विदेशी पक्षियों इत्यादि को देखना पसंद करते हैं तो रोवा वन्यजीव अभयारण्य घूमना आपके लिए बेहतर रहेगा। या अभयारण्य लगभग 86 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। इस अभयारण्य में हरे भरे वनस्पतियां और बहुत सारे जीव पाए जाते हैं। इस अभ्यारण की देखभाल खासी जनजाति द्वारा की जाती है।

यहां पर कई सारे अलग-अलग जीव पाए जाते हैं और इसीलिए यहां पर पर्यटकों की काफी भीड़ रहती है। इसमें कई सारे जंगली जानवर और 120 से भी अधिक विदेशी पक्षियों की प्रजातियां देखने को मिल जाती है। इसके अलावा इसमें बहुत सारे विदेशी जंगली पौधे भी लगे हुए हैं।